नर्तकी नहीं महाराजा छत्रसाल की बेटी थी मस्तानी, दहेज में दिए थे ५० हजार करोड़

नर्तकी नहीं महाराजा छत्रसाल की बेटी थी मस्तानी, दहेज में दिए थे ५० हजार करोड़

5 वर्ष पहले
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इंदौर। संजय लीला भंसाली की फिल्म मस्तानी लंबे अरसे से सुर्खियों में है। बड़े बजट की ये फिल्म अपने भव्य सेट और स्टारकास्ट के कारण खूब चर्चा में बनी हुई है। भारत के इतिहास के दो किरदार बाजीराव पेशवा और उनकी पत्नी मस्तानी के जीवन पर केंद्रित ये फिल्म दिसंबर में रिलीज होगी।
 
dainikbhaskar.com ने इंदौर में रहने वाले बाजीराव पेशवा और मस्तानी के वंशजों से जब इस बारे में चर्चा की तो उनके पास बिखरे इतिहास के पन्नों से ऐसे कई तथ्य निकलकर आए जो प्रचलित धारणाओं से एकदम अलग हैं।

मस्तानी को दहेज में दी थी हीरे की दो खदानें और सोने की 32 लाख मोहरें 
बाजीराव पेशवा और मस्तानी के वंशज जुबेर बहादुर जोश, जुनेद अली बहादुर और तमकीन अली बहादुर इंदौर में रहते हैं। वे बताते हैं कि मस्तानी बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल की बेटी थी। उनका वास्तविक नाम कंचनी था। महाराजा अपनी इस बेटी को बेहद चाहते थे। मस्तानी के विवाह में उन्होंने इतना दहेज दिया था कि उस समय के राजा महाराजाओं की आंखें चौंधिया गईं थीं। विदाई के समय मस्तानी को दहेज के रूप में उन्होंने पन्ना में हीरे की दो खदानें, सोने की 32 लाख मोहरें और सोने और चांदी के असंख्य बर्तन और गहने दिए थे। जानकारों के मुताबिक इस संपदा का मूल्य 50 हजार करोड़ के आसपास था। 

नर्तकी नहीं वीरांगना थी मस्तानी 
बहादुर कहते हैं कि ज्यादातर किस्से-कहानियों में मस्तानी के चरित्र को बहुत हलके ढंग से उकेरा गया है। उन्हें सिर्फ नर्तकी बताया गया है। जबकि वो नर्तकी नहीं थी, बल्कि नृत्य में कुशल थी। इसके अलावा तलवारबाजी, तीरंदाजी और घुड़सवारी में भी उतनी ही निपुण थीं। इतिहास बताता है कि मस्तानी को भले ही उस समय के पंडितों ने स्वीकार नहीं किया, लेकिन वो हिन्दू मुस्लिम संस्कृति के नायाब मेल का प्रतीक थीं। वो कृष्ण की भक्त थीं और नमाज भी पढ़ती थीं। पूजा भी करती थीं और रोजा भी रखती थीं।

बाजीराव पेशवा और मस्तानी के वंशज क्यों हैं मुसलमान 
महाराजा छत्रसाल की बेटी मस्तानी की मां का नाम रूहानी था । वो ईरानी मूल की थीं । मस्तानी का लालन पालन हिन्दू और मुस्लिम परंपराओं के बीच हुआ था। बाजीराव पेशवा ने मस्तानी से जन्में पुत्र का नाम कृष्णाजीराव रखा था, लेकिन उस समय पुणे के ब्राह्मणों ने मुस्लिम मां का पुत्र होने के कारण उनका जनेऊ संस्कार नहीं होने दिया था। तब मजबूरी में बाजीराव ने उन्हें इस्लाम अपनाने को कहा। कृष्णाजी बाद में शमशेर बहादुर के नाम से पहचाने गए। पेशवा ने उन्हें बांदा की रियासत सौंपी थी। इंदौर का बहादुर परिवार उनकी आठवी पीढ़ी में आता है।

फिल्म को लेकर लगाई थी याचिका 
तमकीन अली बहादुर और जुनैद अली बहादुर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म में मस्तानी के सही चित्रण के लिए कोर्ट में याचिक लगाई थी। हाईकोर्ट ने उन्हें सेंसर बोर्ड में जाने के निर्देश दिए थे। तमकीन बताते हैं कि सेंसर बोर्ड ने अभी तक उनकी याचिका का कोई जवाब नहीं दिया है। हम अभी अपने अधिवक्ता से सलाह ले रहें हैं। उनकी सलाह के आधार पर हम फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

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